Dharm & religion; Vigyan & Adhyatm; Astrology; Social research

Dharm & Religion- both are not the same; Vigyan & Adhyatm - Both are the same.....

157 Posts

267 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 954 postid : 330

योगशास्त्र एवं आध्यात्म – १५. मनुष्य और पशु के बुद्धि के विकास में अंतर क्यों ?

Posted On: 20 Jul, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

शरीर विज्ञान के आचार्यो का कहना है कि मनुष्य के बुद्धि का विकास, मस्तिष्क का विकास इसलिए हो सका है कि वह दो पैरो पर खड़ा हो गया | क्या आप सोच सकते है कि इतनी छोटी सी बात इतना विवेक का अंतर कर देगी मनुष्य और जानवर में | एक आइसटिन में और एक बन्दर में कितना फासला है ! इतना फासला एक छोटी सी बात से फलित हुआ है कि मनुष्य दो पैरो पर खड़ा हो गया |

ऐसा इसलिए हुआ कि दो पैरो पर खड़ा होने के कारण मनुष्य के खून कि गति उसके मस्तिष्क कि ओर कम हो गई | ह्रदय खून का पम्प करता है | चूँकि मस्तिष्क ऊपर है, अतः मस्तिष्क तक पहुँचते पहुँचते खून कि गति में शिथिलता आ जाती है जिससे मनुष्य के मस्तिष्क के सूक्ष्म तंतुओ का विकास हो पाया | अगर खून कि धारा तेज होती तो मस्तिष्क के सूक्ष्म तंतु टूट जाते, कभी भी विकसित नहीं हो पाते | इससे ठीक विपरीत, चार पैरो पर चलने के कारण जानवरों का मस्तिष्क सामने की ओर रहता है, ऊपर की और नहीं; जिससे रक्त प्रवाह सतत मस्तिष्क की तरफ तीव्र गति से होती है, जिससे जानवरों के मस्तिष्क के सूक्ष्म तंतु टूट जातें है | मनुष्य के मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम और पशु के मस्तिष्क में रक्त प्रवाह अधिक – बस इतना ही कारण है मनुष्य के बुद्धि के विकास में |

क्या आपने कभी ख्याल किया है कि नींद को ठीक से लेने के लिए सर के नीचे तकिया क्यों रखना पड़ता है | इसका कारण है, और वह यह कि तकिया न लगाने से सर नीचा हो जाता है और खून कि धारा तीव्रता से मस्तिष्क में प्रवाहित होने लगती है जिससे मस्तिष्क तंतुओ को समुचित विश्राम नहीं मिलता | तंतुओ का विश्राम ही नींद है | इसलिए आरामदायक नींद के लिए सर के नीचे तकिया लगाना पड़ता है |

समझ गए न आप | एक छोटी सी घटना ने मनुष्य और पशु में अंतर पैदा कर दिया |

cont.. Er. D.K. Shrivastawa 9431000486

| NEXT



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
July 27, 2010

डी के श्रीवास्तव जी अच्छा लेख है और बहुत ही ज्ञानबर्धक भी पढ़कर बहुत अच्छा लगा

    Er. D.K. Shrivastava Astrologer के द्वारा
    July 27, 2010

    धन्यवाद नवीन जी, इसी तरह से प्रोत्साहित करते रहे |


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran