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Dharm & Religion- both are not the same; Vigyan & Adhyatm - Both are the same.....

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नेताजी – जिन्दा या मुर्दा ३४. प्रश्न २३. आखिर गवाहों की गवाही में इतना विरोधाभाष क्यों?

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आइये, अब नेताजी के मृत्यु से सम्बंधित बयानों में विरोधाभाष को देखे –

ले. कर्नल नोनोगाकी ने शाहनवाज समिति को बताया था कि दुर्घटना के बाद उन्होंने कर्नल रहमान को नेताजी का स्वेटर उतारते देखा था जबकि कर्नल रहमान के अनुसार वे स्वेटर पहने हुए नहीं थे | (सुरेश चन्द्र बोस, डिसेंशिएंट रिपोर्ट, पृष्ठ १२२) |

खोसला आयोग के समक्ष डॉक्टर योशिमी की गवाही के अनुसार – अस्पताल में लाये जाते वक्त नेताजी विल्कुल नंगे थे (खोसला आयोग की बैठके, भाग ६, पृष्ठ २४५५-५८) जबकि अर्दली एम्. कोजुओ (जो नेताजी को स्ट्रेचर पर डालकर अस्पताल में अन्दर लाये थे ) का बयान शाहनवाज समिति के सामने था कि – मिस्टर बोस स्ट्रेचर पर लेटे हुवे थे तथा वायु सेना अधिकारी की वर्दी पहने थे | (सुरेश चन्द्र बोस, डिसेंशिएंट रिपोर्ट, पृष्ठ १३१)

*23*
आखिर गवाहों की गवाही में इतना विरोधाभाष क्यों?
*23*

अगर घटना सच होती तो सबकी नजरे वही देखती है जो घटित होता है | अगर घटना घटित ही न हो तो कल्पनाये भिन्न होगी ही | चाहे लाख झूठ को सच बनाया जाये लेकिन गलती हो ही जाती है क्योकि बनाना पड़ता है | बनाये जाने वाले घटनाओ में कोई न कोई खामी, कोई न कोई दोष रह ही जाता है |

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharatswabhiman के द्वारा
October 16, 2010

आपने बहुत ही अच्छे प्रशन किये है |बस अब भारत के लोगो को समझने की जरूरत है |सभी भारत वासी अगर देश के गदारो को पहचान जाये तो सब कुछ ठीक हो जाये | जागो भारतीयो जागने का वक्त् आ गया है, अत्तीत के गद्दारो को पहचानने का वक्त् आ गया है। उठो सोने वालों सबेरा हुआ है। वतन के फकीरो का फेरा हुआ है।। उठो अब निराशा निशा खो रही है सुनहली-सी पूरब दिशा हो रही है उषा की किरण जगमगी हो रही है विहंगों की ध्वनि नींद तम धो रही है तुम्हें किसलिए मोह घेरा हुआ है उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।। उठो बूढ़ों बच्चों वतन दान माँगो जवानों नई ज़िंदगी ज्ञान माँगो पड़े किसलिए देश उत्थान माँगो शहीदों से भारत का अभिमान माँगो घरों में दिलों में उजाला हुआ है। उठो सोने वालों सबेरा हुआ है। उठो देवियों वक्त खोने न दो तुम जगे तो उन्हें फिर से सोने न दो तुम कोई फूट के बीज बोने न दो तुम कहीं देश अपमान होने न दो तुम घडी शुभ महूरत का फेरा हुआ है। उठो सोने वालों सबेरा हुआ है। हवा क्रांति की आ रही ले उजाली बदल जाने वाली है शासन प्रणाली जगो देख लो मस्त फूलों की डाली सितारे भगे आ रहा अंशुमाली दरख़्तों पे चिड़ियों का फेरा हुआ है। उठो सोने वालों सबेरा हुआ

    D.K.Shrivastava के द्वारा
    October 18, 2010

    धन्यवाद, भारत स्वाभिमान क्या कोई संस्था है ? अगर हाँ, तो इसके बारे में कृपया बताये |


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