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कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे

Posted On 28 Mar, 2011 Others, लोकल टिकेट में

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कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे
Singer: Kishore Kumar
फिल्म : बातो बातो में

कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

कभी सुख कभी दुख यही ज़िंदगी हैं,
ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी हैं
नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

भले तेज़ कितना हवा का हो झोंका
मगर अपने मन में तू रख ये भरोसा
जो बिछड़े सफ़र में तुझे फिर मिलेंगे
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

कहे कोई कुछ भी मगर सच यही है
लहर प्यार की जो कहीं उठ रही है
उसे एक दिन तो किनारे मिलेंगे
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे
उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

Dhiraj kumar (28.5.88) (11.3.2011)

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद काशीवासी के द्वारा
March 28, 2011

आपका शुक्रिया श्रीवास्तव जी इतने महान और विविधरंगी गायक का गीत साझा करने के लिए|

Malkeet Singh JeeT के द्वारा
March 28, 2011

बढ़िया गीत साझा करने का धन्यवाद http://jeetrohann.jagranjunction.com/2011/03/27/%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-holi-contest/


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