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क्रांति नहीं—विद्रोह 3. दमन बड़ी ख़राब चीझ है |

Posted On: 26 May, 2011 Others,लोकल टिकेट में

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एक आदमी कहता है कि मै कसम खाता हूँ कि आज से कम खाना खाऊंगा | इसका मतलब है कि कसम खानी पर रही है | ज्यादा खाने का मन है उसका | एक आदमी कहता है कि मै ब्रहमचर्य का कठोर ब्रत लेता हूँ, उसका मतलब है कि उसके भीतर कामुकता जोरो से धक्के मार रही है | ब्रहमचारी कहता है कि मै स्त्री तो क्या, उसकी साड़ी से भी शारीर स्पर्श नहीं होने दूंगा | क्यों भाई ! हम तो केवल हाड़-मांस की बनी आकृति को ही स्त्री स्वीकार करते है, आपने तो साड़ी को भी स्त्री बना दिया | कपडे को भी स्त्री बना दिया | कपडे में भी आपको स्त्री दिखाई दे रही है | कितने कामुक है या कि भयभीत है, हर चीझ में स्त्री देखते है | ढोंगी है आप, पाखंडी है | आपने अपने मन का जबरदस्ती दमन कर लिया है | दमन बड़ी ख़राब चीझ है | दमन करने वाले व्यक्ति के साथ दो काम होता है – पहला, वह अपनी इच्छा को पाने के लिए आगे का दरवाजा खटखटाता है; दरवाजा बंद है समाज के भय से, पाखंड के कारण, कोई उपाई नहीं तो आदमी पागल हो जाता है एवं दूसरा, पीछे का दरवाजा खटखटाता है, कोई चोर दरवाजा खोजता है | इस प्रकार सामाजिक पाखंड भी पूरा और मन की इच्छा भी पूरी | मन के दमन से व्यक्ति पागल बनता है नहीं तो दोहरा चरित्र वाला | पहला समाज के सामने, दूसरा समाज के पीछे |

संयमी आदमी बड़े खतरनाक होते हैं, क्योंकि उनके भीतर ज्वालामुखी उबल रहा है | जो जितना सधा हुवा संत है वह उतना ही खतरनाक है | उसने मुठ्ठी जोर से बांध रखी है, किन्तु कितनी देर ? जितनी जोर से मुठ्ठी बंधेगी, उतनी ही जल्दी खुलेगी | इस बीच दुनिया भर के पाप खड़े हो जायेंगे | नरक सामने आ जायेगा |

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